Monday, August 10, 2009

हम को ना समझे वो ...
सह लिया हमने वो गम ...
प्यार को हमारे वो ना समझे ...
सह लिया हमने वो गम ...


दर्द लिए सीने में ...
दुनिया में हस्ते रहे हम...


प्यार को मेरे ना समझे...
सह लिया हमने वो गम ...


सोचा था कभी ना कह पाउँगा...
पर यह भी कभी न सोच पाया की कभी इतने दूर भी हो जाऊंगा...


पर अब तोह कहना था तुझसे...
गर अब नही तोह कभी हाल -ऐ- दिल बयान ना कर पाते हम ...

प्यार को मेरे ना समझे वो ...
सह लिया हमने वो गम...


आख़िर कह ही दिया हमने...
और सुनती रही मेरे सनम...

गुजारिश बस इतनी थी ...कुछ तोह कहती वो...
पर... ऊही चली gayi मेरे सनम॥


पर अब उनके लफ्जों की यह बेरुखी ना सह पाएँगे हम...
सच कहता हु...टूट के बिखर जाएँगे हम...

काश दोस्त मानकर इतना एहसान ही वो कर देते...
दो लफ्जों में हां नही तोह... ना ....ही कह देते...

यह बेरुखी तुम्हारी और ना सह पाएँगे हम...
वो तिन लफ्ज़ और किसी को ना कह पाएँगे हम ...
उन्ही गलियों में टूट के बेखर जाऊंगा मैं ...
जहाँ कभी मिला करते थे हम ...


प्यार को मेरे ना समझे ...
सह लिया हमने वो गम...
बस किसी तरह जी रहे है हम...
जी रहे है हम...
अश्को का प्याला
पी रहे है हम...

गम जुदाई का सह रहे है हम...
प्यार को मेरे ना समझे...
सह लिया हमने वो गम ...





SID... LUV U... FOREVER
20/06/09
12:23 am

Monday, May 11, 2009

तनहइयो में बैठ कर दिल को मानते है ...
अपने ज़ख्मो पर ख़ुद मरहम लगाते है ...
मुमकिन नही था उन्हें कभी अपना बनाना ...
रोज़ फिर भी यह ख्वाब हम सजाते है ...
करके गए है वादा हमसे फिर मिलने का ...
बस इंतज़ार में उनके हम वक्त गुजारते है...
माना की वे बेवफा है , मगर फिर भी
करके उन्हें याद दर्द -ऐ -दिल बढाते है ...
थक गए उनका उसका रास्ता देखते देखते ...
कोई बताए जो गए , उसे कैसे भुलाते है ...




SID...LUV U...FOREVER

WRITTEN ON: 5TH SEP 07

02:13 AM

हाँ तुम्हे ही पता है ???



हाँ,,,
तुम्हे ही पता है प्यार होता क्या है ...
ज़िन्दगी के सफर में रास्ता होता क्या है...
क्यों होती है किसी को पाने की खुशी...
क्या होता है किसी को खोने का गम ...


हाँ ,,,
तुम्हे ही पता है प्यार होता क्या है...



अपने गम को भुलाकर ...
किसी की खुशियों में जीना होता क्या है...
अपने खुशियों को भूल कर
किसी के गम में टूट जाना होता क्या है...



हाँ,,,
तुम्हे है प्यार होता क्या है...




तनहा सफर में उन यादो को संजो
कर जीना होता क्या है...
ना होते हुए भी
किसी का साथ होना क्या है...
उन बीते पल को अकेले जीना होता क्या है ...


हाँ,,,
तुम्हे ही पता है प्यार होता क्या है




SID...LUV U...FOREVER

तेरी बातें


कुछ तो है तेरी बातों में ...
जो याद आते है मुझे तनहा रातों में ...
उन झील से गहरी आखों में ...
वो शेतानी भरी निगाहों में ...
कुछ तो है तेरे नैनो में
जो मेरे ख्वाबो में जब आती है
मेरे नींद जाने कहाँ खो जाती है ...
अंधेरे कमरे में बैठ कर
जाने क्या गुनगुनाता हूँ ...
फिर उठकर खुली हवा में खड़ा हो जाता हूँ ...
चाँद को देखता हूँ
फिर दिल से उसे कहता हूँ ...
तुझमे में तो फिर भी दाग है ...
पर मेरा चाँद तो बेदाग़ है ...
कुछ अश्क बह जाते है
पर फिर तेरे कसम याद आती है ...
फिर जाकर अपने कमरे में लौट जाता हूँ...
कुछ तराने और गुनगुनाता हु ...
न जाने कब पलके भारी हो जाती है ,,,
पल भर को नींद आती है
और अगले ही पल
चिडयों के चहकने की आवाज़ आती है ...
जब खिड़की से बहार झाकता हूँ ,,,
तब सूरज को अपने सामने पता हु ...
उसकी लाली को देखकर सुकून आता है ,,,
पर अगले ही पल तेरा चेहरा नज़र आता है
तेरे लाली के सामने उसकी लाली फीकी पता हु ...
जब उठकर बाग़ में जाता हु
फूलो की महक से आनंद पता हु ...
पर अगले ही पल तेरे महक याद आती है ...
फिर तेरे सामने वो भी फीकी पता हु ...

तेरी बातो की मिठास जब याद आती है ...
आखें मेरे फिर नम हो जाती है ...
कुछ तो है तेरे बातों में ...
सिर्फ़ तेरी बातो में ...
सिर्फ़ तेरी बातों में ...



SID... LUV U...FOREVER