Monday, May 11, 2009

तनहइयो में बैठ कर दिल को मानते है ...
अपने ज़ख्मो पर ख़ुद मरहम लगाते है ...
मुमकिन नही था उन्हें कभी अपना बनाना ...
रोज़ फिर भी यह ख्वाब हम सजाते है ...
करके गए है वादा हमसे फिर मिलने का ...
बस इंतज़ार में उनके हम वक्त गुजारते है...
माना की वे बेवफा है , मगर फिर भी
करके उन्हें याद दर्द -ऐ -दिल बढाते है ...
थक गए उनका उसका रास्ता देखते देखते ...
कोई बताए जो गए , उसे कैसे भुलाते है ...




SID...LUV U...FOREVER

WRITTEN ON: 5TH SEP 07

02:13 AM

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