पल भर में यह क्या हो गया ...
ज़मीन छीन गयी आसमान खो गया ...
इन फिजा में से जाने क्या खो गया ...
बदरंग हुआ आसमान ...रुक गयी नदिया ...न जाने मेरा ऐसा क्या खो गया ...
उम्मीद थी की वो कभी हमारी अपनी हो जाएंगी ..
पर यह यकीन न था की इस तरह हमको पराया कर के चली जाएगी ..
Sunday, October 24, 2010
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