कुछ तो है तेरी बातों में ...
जो याद आते है मुझे तनहा रातों में ...
उन झील से गहरी आखों में ...
वो शेतानी भरी निगाहों में ...
कुछ तो है तेरे नैनो में
जो मेरे ख्वाबो में जब आती है
मेरे नींद जाने कहाँ खो जाती है ...
अंधेरे कमरे में बैठ कर
जाने क्या गुनगुनाता हूँ ...
फिर उठकर खुली हवा में खड़ा हो जाता हूँ ...
चाँद को देखता हूँ
फिर दिल से उसे कहता हूँ ...
तुझमे में तो फिर भी दाग है ...
पर मेरा चाँद तो बेदाग़ है ...
कुछ अश्क बह जाते है
पर फिर तेरे कसम याद आती है ...
फिर जाकर अपने कमरे में लौट जाता हूँ...
कुछ तराने और गुनगुनाता हु ...
न जाने कब पलके भारी हो जाती है ,,,
पल भर को नींद आती है
और अगले ही पल
चिडयों के चहकने की आवाज़ आती है ...
जब खिड़की से बहार झाकता हूँ ,,,
तब सूरज को अपने सामने पता हु ...
उसकी लाली को देखकर सुकून आता है ,,,
पर अगले ही पल तेरा चेहरा नज़र आता है
तेरे लाली के सामने उसकी लाली फीकी पता हु ...
जब उठकर बाग़ में जाता हु
फूलो की महक से आनंद पता हु ...
पर अगले ही पल तेरे महक याद आती है ...
फिर तेरे सामने वो भी फीकी पता हु ...
तेरी बातो की मिठास जब याद आती है ...
आखें मेरे फिर नम हो जाती है ...
कुछ तो है तेरे बातों में ...
सिर्फ़ तेरी बातो में ...
सिर्फ़ तेरी बातों में ...
SID... LUV U...FOREVER

sid ....this is one of the best poem i ever heard....
ReplyDeletethis blog is also lovely.....
nice work dear.....
all d best.....
THANKS YAAR...
ReplyDeleteHow beautiful..
ReplyDeleteI felt the emotion in that poem..
u have touched me.
That was awesome.
P!Y@
thnks
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ReplyDeletenice one siddhu
ReplyDeletethnk u thnk u
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