Sunday, August 4, 2013

Hum khush hote rahe ...

वो बेठे बेठे अपने बालो को सवारती रही ,
हम बेठे बेठे उनको निहारते रहे … 

वो ना जाने कुछ बोलती रही , 
हम बेठे उनको देखते रहे... 
 वो बोलती और हम बातों की बीच की ख़ामोशी का मज़ा लेते रहे,
वो हस्ती रही  हम खुश होते रहे … 

वो बेठे बेठे अपने बालो को सवारती रही ,

हम बेठे बेठे उनको निहारते रहे … 


बाहों में वो हमारी थी,
पर थे हम उनके निगाहों  के कैद में थे   …
खुशी  हमको जितनी थी देखी  उनके आखों में थी  … 

वो बेठे बेठे अपने बालो को सवारती रही ,
हम बेठे बेठे उनको निहारते रहे … 


मन की बातें  हम फिर पढने लगे ,
धुन्द  जो छाई  थी वो चट्टने लगी  …
गलत हम साबित  होते रहे पर फिर भी हम ही खुश होते रहे।वो बेठे बेठे अपने बालो को सवारती रही ,
हम बेठे बेठे उनको निहारते रहे … 

पीते  रहे  हम शराब ,
पर नशा तुम्हारा हम पर चड़ने लगा  … 
जाम   छलकता रहा और हम खुश होते रहे।  

तुम्हारी  आखों में खुद  को देखते   रहे ,
और हम खुश होते रहे  …
वो बेठे बेठे अपने बालो को सवारती रही ,
हम बेठे बेठे उनको निहारते रहे … 

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