वो बेठे बेठे अपने बालो को सवारती रही ,
हम बेठे बेठे उनको निहारते रहे …
हम बेठे बेठे उनको निहारते रहे …
वो ना जाने कुछ बोलती रही ,
हम बेठे उनको देखते रहे...
वो बोलती और हम बातों की बीच की ख़ामोशी का मज़ा लेते रहे,
वो हस्ती रही हम खुश होते रहे …
बाहों में वो हमारी थी,
पर थे हम उनके निगाहों के कैद में थे …
खुशी हमको जितनी थी देखी उनके आखों में थी …
पर थे हम उनके निगाहों के कैद में थे …
खुशी हमको जितनी थी देखी उनके आखों में थी …
वो बेठे बेठे अपने बालो को सवारती रही ,
हम बेठे बेठे उनको निहारते रहे …
हम बेठे बेठे उनको निहारते रहे …
मन की बातें हम फिर पढने लगे ,
धुन्द जो छाई थी वो चट्टने लगी …
गलत हम साबित होते रहे पर फिर भी हम ही खुश होते रहे।वो बेठे बेठे अपने बालो को सवारती रही ,
हम बेठे बेठे उनको निहारते रहे …
पीते रहे हम शराब ,
पर नशा तुम्हारा हम पर चड़ने लगा …
हम बेठे बेठे उनको निहारते रहे …
पर नशा तुम्हारा हम पर चड़ने लगा …
जाम छलकता रहा और हम खुश होते रहे।
तुम्हारी आखों में खुद को देखते रहे ,
और हम खुश होते रहे …वो बेठे बेठे अपने बालो को सवारती रही ,
हम बेठे बेठे उनको निहारते रहे …
और हम खुश होते रहे …वो बेठे बेठे अपने बालो को सवारती रही ,
हम बेठे बेठे उनको निहारते रहे …


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